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इतिहास और मील के पत्थर

1960-1969

  • प्रोफेसर बी.डी. टिळक, सुप्रतिष्ठित कार्बनिक रसायनज्ञ और एन.सी.एल. के संयुक्त निदेशक ने एनसीएल के चौथे निदेशक के पद का कार्यभार सम्भाला (1966-78)
  • समय की मॉंग को पूरा करने के लिए एनसीएल में कार्बनिक मध्यक प्रभाग एवं रंजक तथा प्रक्रिया विकास प्रभाग नामक दो नए कार्यात्मक विभाग बनाए गए।
  •  अनाज के उत्पादन में आत्मानिर्भरता प्राप्त करने हेतु भारत सरकार के आव्हान तथा हरित क्रान्ति के शुभारम्भ पर एनसीएल में कृषिरसायन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास प्रभाग की स्थापना की गई । राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ती ( तथा केन्द्रीय कृषि मंत्री ) श्री सुब्रमणियन द्वारा इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए । प्रो. बी.डी. टिळक, निदेशक, एनसीएल ने राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग के सदस्य के रूप में सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में कृषिरसायन के अनुसंधान एवं विकास हेतु योजनाऍं बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी ।
 
  • एनसीएल, क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, जोरहाट (वर्तमान में एनईआईएसटी) एवं क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, हैदराबाद (वर्तमान आईआईसीटी) ने प्रक्रिया रसायनविज्ञान विकसित किया, प्रक्रियाओं को समुन्नत किया एवं इसकी अभियांत्रिकी की डिज़ाइन बनाई तथा आवश्यकताओं के आधार पर उक्त प्रक्रियाओँ को उद्योग जगत को सौंपा । एनसीएल/सीएसआईआर ने घरेलू कृषिरसायन उद्योग की शुरूआत की । सीएसआईआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी पर आधारित कृषिरसायनों के उत्पादन हेतु भारत सरकार ने हिन्दुस्तान इनसेक्टिसाइडस लिमिटेड नामक एक सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी की स्थापना की । एनसीएल/आईआईसीटी/ एनईआईएसटी द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी से प्रथम पीढ़ी के कई कीटनाशकों का आज भी उत्पादन किया जाता है ।
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  • एनसीएल ने औद्यौगिक अनुप्रयोगों हेतु रसायनविज्ञान एवं रासायनिक अभियांत्रिकी के कौशल को एक सूत्र में पिरोया । इस प्रकार विषयान्तर अनुसंधान के क्षेत्र में एनसीएल ने पहली बार प्रवेश किया जो आने वाले दशकों में एनसीएल की उत्कृष्टता एवं श्रेष्ठता का प्रमाणचिह्न (हॉलमार्क) बना रहेगा।
  • एनसीएल ने ऐसीटैलिनाइड, क्लोरोबेन्ज़ीन, नाइट्रोबेन्ज़ीन ऐनिलीन आदि कार्बनिक रसायनों हेतु बिल्डिंटग ब्लॉक के लिए प्रक्रिया रसायनविज्ञान एवं अभियांत्रिकी तथा संयंत्र डिज़ाइन विकसित की। इसके अलावा एनसीएल ने भारत में प्रथम बार बेन्ज़ोइक अम्ल,टाइटेनियम, टेट्राक्लोराइड एवं कैल्शियम हाइपोफॉस्फाइट के व्यापारिक स्तर पर उत्पादन में योगदान दिया ।
  • भारत सरकार ने एनसीएल द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी के आधार पर अपने देश में कार्बनिक रसायनों के उत्पादन हेतु हिन्दुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड (एचओसी) नामक पहली सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी स्थापित की जो पुणे से लगभग 100 कि.मी. दूरी पर रसायनी नामक स्थान में स्थित है। निदेशक, एनसीएल को इस कम्पनी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया । इस प्रकार एनसीएल ने प्रथम भारतीय कार्बनिक रसायन उद्योग की शुरूआत की ।
  • एनसीएल द्वारा विकसित कई प्रक्रियाओं एवं उत्पाद-प्रौद्योगिकियों को उद्योग जगत को हस्तानन्तारित किया गया जिसके बदले में उनसे हस्तान्तरण – शुल्की प्राप्ती हुआ। एनसीएल ने उद्योगों द्वारा वित्त – पोषित प्रायोजित अनुसंधान पर कार्य करना आरम्भ किया ।
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  • एनसीएल ने अपनी अनुसंधान अवसंरचना का विस्तार किया । इसके अन्तर्गत यान्त्रिक एवं कॉंच धमन कर्मशालाऍं स्थातपित की गईं । इसके अलावा एक अल्पावहारगृह, एक सहकारी भण्डार, एनसीएल डाकघर हेतु एक इमारत, छात्रावास का निर्माण किया गया और एनसीएल कॉलनी का भी विस्तार किया गया ।
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