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इतिहास और मील के पत्थर

1940-1949

Shanti Swarup

एक संकल्पना का जन्म :

‘‘सितम्बर, 1941 के प्रारंभ में मैने भारत में राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला की स्थापना का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रस्तुत किया । भारत सरकार ने तथा सर ए. रामास्वा‍मी मुदलियार की अध्यक्षता में गठित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान बोर्ड ने जुलाई, 1943 को आयोजित अपनी दसवीं बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की और राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला के लिए एक योजना समिति को नियुक्त करने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू की’’

शान्ति स्वरूप भटनागर (1894-1955)

Shanti Swarup, Bhatnagar, (1894-1955)

 

 

  • भारत सरकार ने वर्ष 1944 में एनसीएल के भवन निर्माण एवं अन्य प्रमुख व्यय हेतु रु.25 लाख की राशि आबंटित की ।
  • नई स्थापित होने वाली संस्था की भावना को दृष्टि में रखते हुए भारत सरकार ने सीएसआईआर से कहा कि वह एनसीएल की स्थापना में उद्योग जगत की सहायता ले ।
  • डॉ. डी.जी. कर्वे, प्राचार्य, बृहन् महाराष्ट्र कॉमर्स कॉलेज (बीएमसीसी) को एनसीएल की स्थापना हेतु स्थानीय सलाहकार समिति का अध्य‍क्ष नियुक्त किया गया ।

 

 

एन.सी.एल. के कार्य एवं उद्देश्य (1945)

  • मौलिक विज्ञान के उन्नयन एवं विकास पर पर्याप्त ध्यान देते हुए रसायन विज्ञान के सभी अनुप्रयोगों को कार्यान्वित करना ।
  • विश्वविद्यालयों, राज्यों , वैज्ञानिक संस्थाओं और उद्योगों के मध्य सम्पंर्क के रूप में कार्य करना ।
  • ज्ञानार्जन हेतु मूल अनुसंधान सम्पादित करना जो समग्र रूप से औद्योगिक विकास के लिए सहायक सिद्ध होगा ।
  • वर्तमान प्रक्रियाओं में सुधार, कच्चे माल के संसाधनों का पूरी क्षमता से उपयोग तथा नई प्रक्रियाओं और उत्पादों की खोज के बाद प्रायोगिक एवं विकास कार्य सम्पादित करना ।
meeting panel
 
  • एनसीएल का निर्माण 475 एकड़ भूमि पर करने की योजना वर्ष 1945 में पूरी की गई ।
  • स्वतंत्रतापूर्व भारत में बम्‍बई राज्‍य के प्रधानमंत्री श्री बी.जी. खेर ने 6 अप्रैल, 1947 को एनसीएल के भवन का शिलान्‍यास किया ।
foundation1
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भविष्यव निरूपण

‘‘ऐसा कोई नया स्थान नहीं है जहॉं भारतीय कुछ काम करने के लिए सोच सकें । केवल एक ऐसा नया स्था‍न जो हमारी नजरों में है, वह हमारा मस्तिष्क है जिसे अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में साकार करना है। राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं से उत्पन्न होने वाले इन्हीं स्रोतों पर हमें वर्तमान और भविष्य के लिए निर्भर होना होगा ताकि हम अपने जीवनस्तर को सुधार कर उसे समुन्नत कर सकें तथा विश्व के सर्वोत्तम देशों में अपना स्थान बना सकें ।’’

शान्ति स्वरूप भटनागर
6 अप्रैल, 1947
  • वर्ष 1948 में वास्‍तुकार मास्‍टर साठे एवं भुता, बम्‍बई की देखरेख में प्रयोगशाला का निर्माण कार्य आरम्भ हुआ । एनसीएल की मुख्य इमारत का निर्माण रु.35 लाख की कुल लागत से हुआ है । इस इमारत का कुल क्षेत्रफल 130,000 वर्ग फीट है ।
house of Tatas

टाटा घराने का एक दूसरा उदारतापूर्ण कार्य

‘‘ टाटा संगठन ने एन.सी.एल. की स्थापना में अधिक रुचि प्रदर्शित की और उन्होंने इस प्रयोजन हेतु सी.एस.आई.आर. को रू.8,30000 की राशि उदारतापूर्वक दी । मैं इस उदारतापूर्ण योगदान के लिए टाटा घराने के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए धन्यवाद देता हूँ ।’’

शान्तिस्वरूप भटनागर
6 अप्रैल, 1947

  • मार्च 1949 से प्रयोगशाला के मुख्य भवन में अनुसंधान कार्य आरम्‍भ हुआ।
  • एनसीएल की स्‍थापना रसायनविज्ञान के अन्‍तर्गत औद्योगिक विकास की दृष्‍टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान करने, अन्‍य वैज्ञानिक एवं शैक्षिक संस्‍थाओं के साथ सहयोग करने और भारतीय उद्योग जगत को व्‍यापारिक स्‍तर पर लाभ पहुँचाने वाली प्रौद्योगिकी का विकास करने के उद्देश्‍य से की गई ।
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