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बायोरिफाइनरी उप-उत्पादों (byproducts) और प्लास्टिक अपशिष्ट का तेजी से बढ़ता संचय एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि इनका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता और ये पारिस्थितिकी तंत्र में लंबे समय तक बने रहते हैं। ये अपशिष्ट धाराएँ लिपिड्स, ग्लिसरॉल व्युत्पन्न (glycerol derivatives) और प्लास्टिक- व्युत्पन्न मध्यवर्ती जैसे कार्बन स्रोतों से समृद्ध होती हैं, जो उनके मूल्य संवर्धन (valorization) की महत्वपूर्ण क्षमता को दर्शाती हैं। हमारा समूह इन अपशिष्टों को जैव-आधारित (bio-based) नवीकरणीय उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए बैक्टीरियल माइक्रोकम्पार्टमेंट्स (MCPs) तकनीक का उपयोग करता है। MCPs प्रमुख एंजाइमों के स्थानिक संगठन (spatial organization) को सक्षम बनाते हैं, जिससे चयापचय (metabolic) दक्षता बढ़ती है, मध्यवर्ती पदार्थों की विषाक्तता कम होती है और वांछित अंतिम उत्पादों की ओर मार्ग प्रवाह (pathway flux) में वृद्धि होती है। यह दृष्टिकोण MCP-इंजीनियर्ड सूक्ष्मजीव प्रणालियों का उपयोग करते हुए बायोरिफाइनरी से प्राप्त लिपिड्स और प्लास्टिक अपघटन (degradation) उत्पादों को बायोन्यूएबल्स (bionewables) जैसे जैव ईंधन, हरित रसायनों और अन्य मूल्य-वर्धित रसायनों में अपसाइकिल करने पर केंद्रित है। महत्वपूर्ण रूप से यह रणनीति कम-मूल्य या समस्याग्रस्त अपशिष्ट को उच्च-मूल्य संसाधनों में परिवर्तित करके टिकाऊ जैव-निर्माण (sustainable biomanufacturing) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को समर्थन देती है। यह MCP-आधारित जैव-उत्प्रेरण (biocatalysis) की भूमिका को उजागर करती है, जो सर्कुलर बायोइकोनॉमी (circular bioeconomy) ढांचे को आगे बढ़ाने, पर्यावरणीय बोझ को कम करने तथा संसाधन दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने में सहायक है।

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