Skip to main content
accessibility-icon
Accessibility Tools
Color Contrast
High Contrast
Normal Contrast
Text Size
Font Size Increase
Font Size Decrease
Normal Font
Text Spacing
Line Height

हमारा समूह हैलोजनीकृत पॉलिमर और पॉलीयूरीथेन के पुनर्चक्रण (recycling) के लिए स्‍थायी (sustainable) विधियों के विकास में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, ताकि उनसे मूल्य-वर्धित रसायन और सामग्री प्राप्त की जा सकें। हैलोजनीकृत पॉलिमर का पुनर्चक्रण चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि हाइड्रोजन हैलाइड का आसानी से उत्सर्जन होता है, जो रिएक्टर को संक्षारित करता है और उत्प्रेरक (catalyst) को निष्क्रिय कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए हमने एक प्रभावी क्लोरीनीकरण विधि विकसित की है, जिसमें PVC/PVDC को आवश्यकता अनुसार क्लोरीन स्रोत के रूप में उपयोग करके मूल्यवान क्लोरीनयुक्त यौगिकों का उत्पादन किया जाता है। डिहैलोजनीकृत पॉलिमर का उपयोग ऊर्जा भंडारण उपकरणों में किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर एक प्रवाह प्रणाली में भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है। पॉलीयूरीथेन विश्व में छठा सबसे अधिक उत्पादित पॉलिमर है, जिसका उपयोग गद्दे के फोम से लेकर कठोर प्लास्टिक तक विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जाता है। इसमें उपस्थित अत्यंत स्थिर कार्बामेट (carbamate) समूह के कारण इसका पुनर्चक्रण बहुत कठिन होता है, जिसके लिए सामान्यतः कठोर अभिक्रिया परिस्थितियाँ और महंगे धातु उत्प्रेरकों की आवश्यकता होती है। हमने एक इलेक्ट्रोकेमिकल रणनीति प्रदर्शित की है, जो 60°C पर कार्य करती है और पॉलीयूरीथेन को संबंधित यूरिया और पॉलीओल में परिवर्तित करती है, जिससे 85% तक डीकंस्ट्रक्शन (deconstruction) प्राप्त होता है। अपशिष्ट पॉलीयूरीथेन से संश्लेषित उत्पादों में से एक है एन, एन′-(मेथिलीनबीस(4,1-फेनिलीन) बीआईएस (मॉर्फोलिन-4-कार्बोक्सामाइड) जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹30,000 प्रति ग्राम है (Sigma-Aldrich, CAS Number: 64346-29-8)।

Research Area Image
An unhandled error has occurred. Reload 🗙