प्लास्टिक रीसाइक्लिंग में ‘जीवन के अंत ’ की अवधारणा उस चरण को दर्शाती है, जब प्लास्टिक उत्पाद या सामग्री अपने उपयोगी जीवन के अंत तक पहुँच जाती है और उसका आगे उपयोग संभव नहीं रहता। इसलिए, प्लास्टिक के यांत्रिक पुनर्चक्रण (mechanical recycling) से आगे बढ़ते हुए सीएसआईआर- राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) में प्लास्टिक अपशिष्ट को इस ‘जीवन के अंत’ चरण तक प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पॉलिमर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग प्रभाग की एक शोध टीम प्लास्टिक का रासायनिक उपचार करके मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने पर कार्य कर रही है। टीम ने सफलतापूर्वक अपशिष्ट पॉलीथीन को एक मूल्यवान उत्पाद, डोडेसीन में परिवर्तित करने का प्रदर्शन किया है। अंतिम उत्पाद की अर्थव्यवस्था से मूल्य संवर्धन स्पष्ट होता है: अपशिष्ट पॉलीथीन की लागत ₹5/किलोग्राम है, जबकि डोडेसीन की लागत लगभग ₹400/किलोग्राम है। इस अध्ययन में उपयोग की गई डव शैम्पू की बोतल का धातु उत्प्रेरक-सहायता प्राप्त रासायनिक उपचार किया जाता है और उसे डोडेसीन में परिवर्तित किया जाता है। प्रयोगशाला में किया गया एक और महत्वपूर्ण कार्य अपशिष्ट पॉलीथीन को ब्यूटेन (Butene) में परिवर्तित करना है। यह मोनोमर आगे नए पॉलिमराइजेशन अभिक्रियाओं में पुनः उपयोग किया जा सकता है।
